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Sindhu valley civilization features,सिंधु घाटी सभ्यता की महत्वपूर्ण तथ्य

सिंधु घाटी सभ्यता

Sindhu valley civilization features

सिंधु घाटी सभ्यता की महत्वपूर्ण तथ्य

  1. लोथल की खुदाई एसआर राव ने की थी।
  2. लोथल भोगवा नदी के तट पर स्थित है।
  3. लोथल से युगल शवधान प्राप्त हुआ है जिसमें सिर पूर्व तथा पर पश्चिम की तरफ लिटाया गए हैं।
  4. लोथल से गोदी के अवशेष मिले हैं।
  5. लोथल एवं रंगपुर से चावल के अवशेष एवं छिलकों के साथ बर्तनों से मिले हैं।
  6. सुरकोटदा से घोड़े की हड्डियां मिली हैं।
  7. रंगपुर और रोजड़ी से हड़प्पा संस्कृति की उत्तर अवस्था के दर्शन होते हैं।

Sindhu valley civilization features,सिंधु घाटी सभ्यता की महत्वपूर्ण तथ्य

सिंधु घाटी सभ्यता

Sindhu valley civilization features

सिंधु घाटी सभ्यता की महत्वपूर्ण तथ्य

  1. हड़प्पा में एक शव के सिर को दक्षिण की ओर रखकर दफनाया गया है।
  2. हड़प्पा से ही एक कब्रिस्तान एच( H) तथा R-37 मिला है।
  3. मोहनजोदड़ो की खुदाई 1922 में राखल दास बनर्जी के नेतृत्व में हुई।
  4. मोहनजोदड़ो सिंधु नदी के तट पर लरकाना जिले में है
  5. मोहनजोदड़ो से सूती व ऊनी वस्त्र के साक्ष्य मिले हैं।
  6. पशुपति शिव तथा पुजारी का सिर मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुआ है।
  7. विशाल स्नानागार जिसका आकार 11.8 8 ×7.01 × 2.43 मीटर है।
  8. विशाल अन्ना नगर जिसका आकार 45.1 × 15.23 मीटर है।
  9. मोहनजोदड़ो से सात परते मिली हैं जिन से ज्ञात होता है कि यह नगर सात बार बसाया गया होगा।
  10. मोहनजोदड़ो को सिंध का नखलिस्तान या सिंध का बाग कहते हैं।

Sindhu valley civilization features,सिंधु घाटी सभ्यता की महत्वपूर्ण तथ्य

सिंधु घाटी सभ्यता
  1. सिंधु घाटी सभ्यतासे जूते हुए खेत के साक्ष्य मिले हैं।
  2. कालीबंगा से अग्निकुंड या हवन कुंड के साक्ष्य मिले हैं।
  3. लकड़ी की नाली भी कालीबंगा से प्राप्त हुई है।
  4. कालीबंगा की खुदाई बीवी लाल ने की।
  5. कालीबंगा गंगा नदी के तट पर बसा है।
  6. हड़प्पा से एक दर्पण प्राप्त हुआ है जो तांबे का बना हुआ है।
  7. हड़प्पा से काशी की बनी एक नर्तकी की मूर्ति प्राप्त हुई है।
  8. हड़प्पा से तांबे की बनी हुई है इक्का गाड़ी प्राप्त हुई है।
  9. हड़प्पा की खुदाई 1921 में दयाराम साहनी के नेतृत्व में हुई।
  10. हड़प्पा रावी नदी के तट पर स्थित है।

Sindhu valley civilization features,सिंधु घाटी सभ्यता की महत्वपूर्ण तथ्य


सिंधु घाटी सभ्यता

  1. सर्वप्रथम कपास उगाने का शरीर सिंधु सभ्यता के लोगों को है।
  2. हड़प्पा सभ्यता मुक्ता कांस्य युगीन सभ्यता थी। यहां के मृदभांड लाल व काले रंग के हैं।
  3. हड़प्पा नामक पूरा स्थल से ज्ञात होने के कारण हड़प्पा सभ्यता कहते हैं।
  4. सिंधु सभ्यता त्रिभुजाकार क्षेत्र में फैली हुई थी।
  5. इसका क्षेत्रफल 1299600 वर्ग किलोमीटर था।
  6. सर्वप्रथम 1826 इस्वी में चार्ल्स मेसन ने हड़प्पा नामक स्थल से प्राप्त विशाल टीले के विषय में उल्लेख किया।
  7. इतिहासकारों ने हड़प्पा को सिंधु सभ्यता की प्रथम राजधानी माना है।
  8. कालीबंगा के उत्खनन में निचली सतह से पूर्व सिंधु सभ्यता और ऊपरी सतह से सिंधु सभ्यता के अवशेष मिले हैं।
  9. कालीबंगा से प्राप्त फर्श में अलंकृत ईटों का प्रयोग किया गया है।
  10. कालीबंगा से काली मिट्टी की चूड़ियां मिली है।

इतिहास (सिंधु घाटी सभ्यता)

इतिहास (सिंधु घाटी सभ्यता)

  1. सिंधु वासियों की लिपि में लगभग 400 वर्ण हैं लिपि की लिखावट दाएं से बाएं और मानी गई है।
  2. पिगट महोदय ने हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो को एक विस्तृत साम्राज्य की जुड़वा राजधानियां बताया है।
  3. सिंधु वासी दशमलव प्रणाली पर आधारित बांटो का प्रयोग करते थे।
  4. अधिकांश बाट 16 या उसके गुणज  भार के हैं। जैसे 16,32,64,160 इत्यादि।
  5. संभवत सिंधु घाटी के लोगों ने सर्वप्रथम चांदी का इस्तेमाल किया था।
  6. नदी व वर्षा के जल से सिंधु वासी सिंचाई करते थे।
  7. हड़प्पा के टीलों की तरफ सर्वप्रथम चार्ल्स मैसन ने 1826 में ध्यान आकर्षित किया।
  8. हड़प्पा की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि व पशुपालन पर आधारित थी
  9. हड़प्पा में आंतरिक व बाह्य व्यापार भी होता था।
  10. सिंधु वासियों का मुख्य खाद्यान्न गेहूं व जौ था।

इतिहास (सिंधु घाटी सभ्यता)

इतिहास (सिंधु घाटी सभ्यता)

  1. सिंधु वासियों ने सर्वप्रथम कपास की खेती की थी
  2. अधिकांश मोहरे सेलखड़ी की बनी हुई हैं
  3. सिंधु सभ्यता के निर्माता भूमध्यसागरीय (द्रविड़) थे।
  4. सिंधु वासी पशु महादेव की पूजा करते थे।
  5. सिंधु कालीन मिट्टी से निर्मित सड़कों की चौड़ाई 30 फुट से 35 फुट तक हुआ करती थी।
  6. सिंधु कालीन गलियां प्राय: 3 फुट चौड़ी हुआ करती थी।
  7. सिंधु वासी राजस्थान स्थित खेतड़ी की खानों से तांबा प्राप्त करते थे।
  8. सिंधु सभ्यता के निवासी लौह धातु से अनजान थे।
  9. सिंधु सभ्यता की सभी सड़कें मिट्टी से बनी हुई थी।
  10. सिंधु वासियों की लिपि चित्र प्रधान लिपि थी।

Institutions' founders in the world

Q.No: 6: Lion’s Club

Ans: Melvin John


Q.No: 7: Salvation Army

Ans: William Booth


Q.No: 8: Nursing System

Ans: Florence Nightingale


Q.No: 9: Fascism

Ans: Benito Mussolini


Q.No: 10: Protestant Religion

Ans: Martin Luther 

Institutions' founder in the world

Q.No: 1: United Nations

Ans: Joseph Stalin (USSR), Winston Churchill (UK) and Franklin Delano Roosevelt (USA)



Q.No: 2: Red Cross

Ans: Jean-Henri Dunant


Q.No:3: Boy Scouts

Ans: Baden Powell


Q.No4: Y.M.C.A.

Ans: Sir George Williams


Q.No: 5: Kindergarten
Ans: Froebel

सोनभद्र(sonbhadra), सोने की खान

सोनभद्र
सोनभद्र या सोनभद्र उत्तर प्रदेश, भारत के क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा जिला है।  प्राचीन समय से भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता है इसका कारण है कि भारत कई जगहों पर सोने की खान की असीमित भंडार होना माना  जाता है सोनभद्र  जिले की सोन पहाड़ियों में सोने की भंडार मिलने से इस जगह का नाम सोन नाम से प्राचीन समय से जाना जाता है इस के आस पास के इलाके को सोनांचल क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है भारत का एकमात्र जिला है जो पश्चिम में चार राज्यों अर्थात् दक्षिण में छत्तीसगढ़, दक्षिण पूर्व में झारखंड और उत्तर-पूर्व में बिहार की सीमा में आता है।  जिले का क्षेत्रफल 6788 वर्ग किमी और 1,862,559 (2011 की जनगणना) की आबादी है, जिसकी जनसंख्या घनत्व 270 व्यक्ति प्रति किमी² है। यह राज्य के दक्षिण-पूर्व में स्थित है और मिर्जापुर जिले से उत्तर-पश्चिम, चंदौली जिले तक घिरा हुआ है।  उत्तर में, बिहार राज्य के कैमूरंद रोहतास जिले, उत्तर पूर्व में झारखंड राज्य का गढ़वा जिला, दक्षिण में छत्तीसगढ़ राज्य का बलरामपुर जिला और पश्चिम में मध्य प्रदेश राज्य का सिंगरौली जिला है।  जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज शहर में है।  सोनभद्र जिला एक औद्योगिक क्षेत्र है और इसमें बहुत सारे खनिज जैसे बॉक्साइट, चूना पत्थर, कोयला, सोना आदि हैं। सोनभद्र को "भारत की ऊर्जा राजधानी" कहा जाता है क्योंकि वहाँ बहुत सारे बिजली संयंत्र हैं। सोनभद्र विंध्य और कैमूर पहाड़ियों पर स्थित है।  , और इसके टोपोलॉजी और प्राकृतिक वातावरण ने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरू ने सोनभद्र को भारत का स्विट्जरलैंड कहा।
इस क्षेत्र में सोने की खान का पता अग्रेज के समय से ही लगाया जा रहा था परंतु इस पर मुहर लगते लगते एक लंबा समय बीत चुका है अब जाकर इस क्षेत्र में सोने की खान का पुख्ता सबूत मिलने से और कई तरह के जांच के बाद अब इस क्षेत्र को अधिग्रहण करने तथा खान कि खुदाई के कार्य को सरकार तीव्र गति से इस पर कार्य किया जा रहा है।