What are the disease of crops (tomato,lemon, Mustard and sugarcane etc)
What are the disease of crops (tomato,lemon, Mustard and sugarcane etc)
1
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टमाटर
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पत्तियों का ऐठन
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2
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नींबू
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नाड़ी का ऊतक क्षयन
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3
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बादाम
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रेखा पैटर्न
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4
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सरसों
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मोजेक
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5
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तिल
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फेलोडी
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6
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चुकंदर
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ऐठा हुआ सिशीरो भाग
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7
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भिन्डी
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पीली नाड़ी मोजेक
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8
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गन्ना
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तृण समान प्रारोह
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9
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पपीता
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मोजेक
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10
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केला
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मोजेक
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Common disease and their viruses
Disease and their viruses
1.Chicken Pox
Birareus Varicella
2.Small Pox
2.Small Pox
Borreliora Variola
3 Polio
Legio debilitans
4. Mumps
Rabula inflans
5.Rabies
Formido Inexoeabilis
6. Measles
Briareus Morbillorum
7.Influenza
Tarpeia alpha,Terpeia bita
3 Polio
Legio debilitans
4. Mumps
Rabula inflans
5.Rabies
Formido Inexoeabilis
6. Measles
Briareus Morbillorum
7.Influenza
Tarpeia alpha,Terpeia bita
8. Jaundice of Silk worm
Borreolina bombycis
Which is the smallest cell?
Which is the smallest cell?
Mycoplasma gallisepticum is the smallest cell.
Which is the biggest cell?
Ostrich's egg is the biggest cell.
Which is the longest cell?
Nervous system (neurons) is the longest cell.
What is the scientific name of man, frog, cat,dog,cow, housefly,mango,rice, wheat,pea etc
What is the scientific name of man, frog, cat,dog,cow, housefly,mango,rice, wheat,pea etc
Animals , plants and their
Scientific name
1
Man
Homosapiens
2
Frog
Rana tigrina
3
Cat
Felis domestica
4
Dog
Cainsfamilaris
5
Cow
Bos indicus
6
Housefly
Musca domestica
7
Mango
Mangifera indica
8
Rice
Oryza sativaf
9
Wheat
Tritiksm
10
Pea
Pisum satinum
11
Gram
Cicer arietinum
12
Mustard
Brassia campestris
13
Lion
Panthera Leo
14
Tiger
Panthera tigris
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List of first lady in the world
विश्व में प्रथम महिला
1
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विश्व की प्रथम महिला डॉक्टर
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एलिजाबेथ ब्लैकवेल ,अमेरिका
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2
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किसी मुस्लिम देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री
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बेनजीर भुट्टो, पाकिस्तान
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3
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विश्व की प्रथम महिला राष्ट्रपति
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मारिया एस्टेला रजा बेल, अर्जेंटीना
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4
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विश्व की प्रथम महिला प्रधानमंत्री
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एस भंडारनायके , श्रीलंका
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5
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विश्व की प्रथम सम्मानित महिला
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ब्रिटेन की रानी एलिजाबेथ
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6
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अंतरिक्ष में जाने वाली विश्व की प्रथम महिला
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वैलेंटिना टेरेसाकोवा , रुस
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7
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एवरेस्ट पर चढ़ने वाली विश्व की प्रथम महिला
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जुंको ताबेइ, जापान
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8
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गुटनिरपेक्ष आंदोलन की प्रथम महिला अध्यक्ष
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एस भंडारनायके, श्रीलंका
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9
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ब्रिटेन की पहली रानी
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जेन
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10
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इंग्लैंड की प्रथम महिला प्रधानमंत्री
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मार्गेट थैचर
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11
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विश्व में संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम महिला सभापति
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श्रीमती विजयलक्ष्मी पंडित
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12
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उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाली प्रथम महिला
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एन बैनक्रॉफ्ट
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13
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अंटार्कटिका महाद्वीप पर पहुंचने वाली प्रथम महिला
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जैकी रोने
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14
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कनाडा की प्रथम महिला प्रधानमंत्री
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किम कैंपबेल
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15
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इंग्लिश चैनल पार करने वाली प्रथम महिला
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गर्ट रूड एड रले
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यकृत (लीवर) के कार्य और उसके महत्वपूर्ण तथ्य
- यह अतिरिक्त ग्लूकोज को ग्लाइकोजन के रूप में संचित करता है।
- शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है।
- यूरिया का निर्माण भी करता है
- पित्त रस का निर्माण करता है
- रक्त के ताप को नियंत्रित करता है।
- रुधिर प्रोटीन ओं का निर्माण करता है।
- अतिरिक्त फैटी एसिड को फैट में बदल देता है।
- यह ग्रंथि आमाशय की अधर तल में स्थित होती है जो चारों ओर से पेरीटोनियम झील्ली द्वारा घिरी रहती है जिसके अंदर लैंगर हैंड्स के द्वीप पाए जाते हैं।
- अग्नाशय ग्रंथि द्वारा अग्नाशय रस निकलता है जिसमें ट्रिप्सिन इमाइलॉप्सिन तथा स्टेप्सिन पदार्थ पाए जाते हैं जो भोज्य पदार्थ को पचाता है।
- आहार में लवण का मुख्य उपयोग भोजन को स्वाद देना होता है।
- लवण की स्वाद को पहचानने के लिए जीभ पर लगभग 9000 स्वाद कलिकाएं पाई जाती हैं।
- जीभ का अग्रिम भाग मीठा, पश्च भाग कड़वा, मध्य भाग खट्टा एवं पार्श्व भाग नमकीन स्वाद को ग्रहण करता है।
- मनुष्य के मुख के ऊपर एवं निचले जबड़ों के साथ चार प्रकार के दांत पाए जाते हैं।
यकृत (लीवर) में उपस्थित द्रव्य और उसके भाग
यकृत (लीवर) में उपस्थित द्रव्य और उसके भाग
- यकृत हमारे शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि हैै।
- इसका वजन 1.5 किलोग्राम होता है।
- यह शरीर के उदर गुहा में दाहिने डायफ्राम के नीचे स्थित होता है।
- यकृत के दाहिने ओर निचली सतह पर पित्ताशय (गाल ब्लैडर) स्थित होता है।
- यकृत कोशिकाएं एक विशिष्ट द्रव का स्राव करती है जिसे पितरस(बाइल) कहते है।
- जब शरीर में पित्त का निर्माण ज्यादा या बाइलिरूबीन की मात्रा ज्यादा हो जाती है तो पीलिया (jaundice) हो जाता है।
- यह रोग कभी कभी यकृत में विषाणु के संक्रमण के कारण भी होता है।
मुंह (mouth) में उपस्थित ग्रंथियां एवं एंजाइम
मुंह - मुंह की लार में एमाइलेज नामक एंजाइम पाया जाता हैै जिसके द्वारा कार्बोहाइड्रेट का पाचन होता है।
- पाचन की क्रिया का प्रारंभ मुख में भोजन को चबाने के साथ ही हो जाता है।
- पाचन की प्रक्रिया का प्रारंभ मुंह में भोजन को चबाने के साथ ही हो जाता है।
- लार भोजन में ठीक ढंग से मिल पाती है। जो भोजन को पचाने में मदद करती है।
- मुंह में लगभग 600 लार ग्रंथियां होती है
- पैरोटिक लार ग्रंथि
- सबमेंडिबुलर लार ग्रंथि
- सब्लिंगुअल लार ग्रंथि
मानव लार में टायलिन, मल्टोज एवं लाईसो जाईम नामक एंजाइम पाए जाते है।
- टायलिन स्टार्च या मंड को मल्टोज में परिवर्तन कर देता है।
- लार ग्रंथियां द्वारा स्रावित लार में कई प्रकिंव तथा म्यूकस पाए जाते है।
- लार में 98.5%पानी तथा 1.5%प्रकींव (एंजाइम) पाए जाते है।
- लार हल्का सा अम्लीय होता है। जिसका पीएच मां 6-7 होता है।
मानव शरीर के विभिन्न तंत्र एवं उनकी कार्य प्रणालियां
मानव शरीर के विभिन्न तंत्र एवं उनकी कार्य प्रणालियां
मानव शरीर में मुख्य रूप से आठ प्रकार के तंत्र पाए जाते हैं।
(1) पाचन तंत्र
(2) स्वसन तंत्र
(3) रक्त परिसंचरण तंत्र
(4) उत्सर्जित तंत्र
(5) तंत्रिका तंत्र
(6) जनन तंत्र
(7) पेशीय तंत्र
(7) कंकाल तंत्र
पाचन तंत्र
पाचन वह रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें जीव एंजाइम की सहायता से भोजन के बड़े अणुओं जैसे कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन को सरल अणुओं कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज में, वसा वसीय अम्ल और ग्लिसरॉल में तथा प्रोटीन अमीनो अम्ल में परिवर्तित कर शरीर की अवशोषण की योग्य बना देते हैं।
पाचन तंत्र में भाग लेने वाले विभिन्न अंग
मुंह - मुंह की लार में एमाइलेज नामक एंजाइम पाया जाता हैै जिसके द्वारा कार्बोहाइड्रेट का पाचन होता है।
- पाचन की क्रिया का प्रारंभ मुख में भोजन को चबाने के साथ ही हो जाता है।
- पाचन की प्रक्रिया का प्रारंभ मुंह में भोजन को चबाने के साथ ही हो जाता है।
- लार भोजन में ठीक ढंग से मिल पाती है। जो भोजन को पचाने में मदद करती है।
- मुंह में लगभग 600 लार ग्रंथियां होती है
- पैरोटिक लार ग्रंथि
- सबमेंडिबुलर लार ग्रंथि
- सब्लिंगुअल लार ग्रंथि
श्वसन तंत्र
श्वसन सजीव पोषक तत्वों जैसे ग्लूकोस को तोड़ने के लिए ऑक्सीजन का प्रमुख रूप से उपयोग करते हैं जिससे विभिन्न क्रियाओं को संपादित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्राप्त होती है उपरोक्त उपापचय क्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड भी मुक्त होती है जो हानिकारक है।
इसलिए यह आवश्यक है कि कोशिकाओं को लगातार ऑक्सीजन की उपलब्ध कराई जाए और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर मुक्त किया जाए वायुमंडलीय ऑक्सीजन और कोशिकाओं में उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड के आदान प्रदान की इस प्रक्रिया को सामान्यतया श्वसन कहते है।
Sindhu valley civilization features,सिंधु घाटी सभ्यता की महत्वपूर्ण तथ्य
सिंधु घाटी सभ्यता
Sindhu valley civilization features
सिंधु घाटी सभ्यता की महत्वपूर्ण तथ्य
- लोथल की खुदाई एसआर राव ने की थी।
- लोथल भोगवा नदी के तट पर स्थित है।
- लोथल से युगल शवधान प्राप्त हुआ है जिसमें सिर पूर्व तथा पर पश्चिम की तरफ लिटाया गए हैं।
- लोथल से गोदी के अवशेष मिले हैं।
- लोथल एवं रंगपुर से चावल के अवशेष एवं छिलकों के साथ बर्तनों से मिले हैं।
- सुरकोटदा से घोड़े की हड्डियां मिली हैं।
- रंगपुर और रोजड़ी से हड़प्पा संस्कृति की उत्तर अवस्था के दर्शन होते हैं।
Sindhu valley civilization features,सिंधु घाटी सभ्यता की महत्वपूर्ण तथ्य
सिंधु घाटी सभ्यता
Sindhu valley civilization features
सिंधु घाटी सभ्यता की महत्वपूर्ण तथ्य
- हड़प्पा में एक शव के सिर को दक्षिण की ओर रखकर दफनाया गया है।
- हड़प्पा से ही एक कब्रिस्तान एच( H) तथा R-37 मिला है।
- मोहनजोदड़ो की खुदाई 1922 में राखल दास बनर्जी के नेतृत्व में हुई।
- मोहनजोदड़ो सिंधु नदी के तट पर लरकाना जिले में है
- मोहनजोदड़ो से सूती व ऊनी वस्त्र के साक्ष्य मिले हैं।
- पशुपति शिव तथा पुजारी का सिर मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुआ है।
- विशाल स्नानागार जिसका आकार 11.8 8 ×7.01 × 2.43 मीटर है।
- विशाल अन्ना नगर जिसका आकार 45.1 × 15.23 मीटर है।
- मोहनजोदड़ो से सात परते मिली हैं जिन से ज्ञात होता है कि यह नगर सात बार बसाया गया होगा।
- मोहनजोदड़ो को सिंध का नखलिस्तान या सिंध का बाग कहते हैं।
Sindhu valley civilization features,सिंधु घाटी सभ्यता की महत्वपूर्ण तथ्य
सिंधु घाटी सभ्यता
- सिंधु घाटी सभ्यतासे जूते हुए खेत के साक्ष्य मिले हैं।
- कालीबंगा से अग्निकुंड या हवन कुंड के साक्ष्य मिले हैं।
- लकड़ी की नाली भी कालीबंगा से प्राप्त हुई है।
- कालीबंगा की खुदाई बीवी लाल ने की।
- कालीबंगा गंगा नदी के तट पर बसा है।
- हड़प्पा से एक दर्पण प्राप्त हुआ है जो तांबे का बना हुआ है।
- हड़प्पा से काशी की बनी एक नर्तकी की मूर्ति प्राप्त हुई है।
- हड़प्पा से तांबे की बनी हुई है इक्का गाड़ी प्राप्त हुई है।
- हड़प्पा की खुदाई 1921 में दयाराम साहनी के नेतृत्व में हुई।
- हड़प्पा रावी नदी के तट पर स्थित है।
Sindhu valley civilization features,सिंधु घाटी सभ्यता की महत्वपूर्ण तथ्य
सिंधु घाटी सभ्यता
- सर्वप्रथम कपास उगाने का शरीर सिंधु सभ्यता के लोगों को है।
- हड़प्पा सभ्यता मुक्ता कांस्य युगीन सभ्यता थी। यहां के मृदभांड लाल व काले रंग के हैं।
- हड़प्पा नामक पूरा स्थल से ज्ञात होने के कारण हड़प्पा सभ्यता कहते हैं।
- सिंधु सभ्यता त्रिभुजाकार क्षेत्र में फैली हुई थी।
- इसका क्षेत्रफल 1299600 वर्ग किलोमीटर था।
- सर्वप्रथम 1826 इस्वी में चार्ल्स मेसन ने हड़प्पा नामक स्थल से प्राप्त विशाल टीले के विषय में उल्लेख किया।
- इतिहासकारों ने हड़प्पा को सिंधु सभ्यता की प्रथम राजधानी माना है।
- कालीबंगा के उत्खनन में निचली सतह से पूर्व सिंधु सभ्यता और ऊपरी सतह से सिंधु सभ्यता के अवशेष मिले हैं।
- कालीबंगा से प्राप्त फर्श में अलंकृत ईटों का प्रयोग किया गया है।
- कालीबंगा से काली मिट्टी की चूड़ियां मिली है।
इतिहास (सिंधु घाटी सभ्यता)
इतिहास (सिंधु घाटी सभ्यता)
- सिंधु वासियों की लिपि में लगभग 400 वर्ण हैं लिपि की लिखावट दाएं से बाएं और मानी गई है।
- पिगट महोदय ने हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो को एक विस्तृत साम्राज्य की जुड़वा राजधानियां बताया है।
- सिंधु वासी दशमलव प्रणाली पर आधारित बांटो का प्रयोग करते थे।
- अधिकांश बाट 16 या उसके गुणज भार के हैं। जैसे 16,32,64,160 इत्यादि।
- संभवत सिंधु घाटी के लोगों ने सर्वप्रथम चांदी का इस्तेमाल किया था।
- नदी व वर्षा के जल से सिंधु वासी सिंचाई करते थे।
- हड़प्पा के टीलों की तरफ सर्वप्रथम चार्ल्स मैसन ने 1826 में ध्यान आकर्षित किया।
- हड़प्पा की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि व पशुपालन पर आधारित थी
- हड़प्पा में आंतरिक व बाह्य व्यापार भी होता था।
- सिंधु वासियों का मुख्य खाद्यान्न गेहूं व जौ था।
इतिहास (सिंधु घाटी सभ्यता)
इतिहास (सिंधु घाटी सभ्यता)
- सिंधु वासियों ने सर्वप्रथम कपास की खेती की थी
- अधिकांश मोहरे सेलखड़ी की बनी हुई हैं
- सिंधु सभ्यता के निर्माता भूमध्यसागरीय (द्रविड़) थे।
- सिंधु वासी पशु महादेव की पूजा करते थे।
- सिंधु कालीन मिट्टी से निर्मित सड़कों की चौड़ाई 30 फुट से 35 फुट तक हुआ करती थी।
- सिंधु कालीन गलियां प्राय: 3 फुट चौड़ी हुआ करती थी।
- सिंधु वासी राजस्थान स्थित खेतड़ी की खानों से तांबा प्राप्त करते थे।
- सिंधु सभ्यता के निवासी लौह धातु से अनजान थे।
- सिंधु सभ्यता की सभी सड़कें मिट्टी से बनी हुई थी।
- सिंधु वासियों की लिपि चित्र प्रधान लिपि थी।
इतिहास (पुरापाषाण काल)
इतिहास (पुरापाषाण काल)
- पुरापाषाण काल के उपकरणों में सर्वप्रथम रॉबर्ट ब्रूस फुट ने 1863 में मद्रास के पास पल्लवरम नामक स्थान से हैंड एक्स उपकरण प्राप्त किया।
- मध्य पाषाण काल में भीमबेटका की गुफाओं में भारत में गुफा चित्रकारी के प्राचीनतम साक्ष्य मिले हैं।
- मध्य पाषाण काल में मध्य प्रदेश के आजमगढ़ और राजस्थान में बागोर पशु पालन का प्राचीनतम साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं।
- मध्य पाषाण काल में महादहा से हड्डी के आभूषण व स्त्री पुरुष की युगल समाधि मिली है। महदहा उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित है।
- मध्य पाषाण काल में भारत में मानव अस्थि पंजर का पहला वशिष्ठ प्रतापगढ़ के सराय नाहर राय व महदाहा स्थान से प्राप्त हुआ है।
- भारत में नव पाषाण काल के स्थल की प्रथम खोज लेमेसुरियर ने टोंस नदी घाटी में 1860 ईसवी में की।
- नवपाषाण युगीन प्राचीन बस्ती मेहरगढ़ पाकिस्तान में स्थित है
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की स्थापना अलेक्जेंडर कनिंघम के नेतृत्व में 1861 ईस में की गई।
Wifi calling
दुनिया के 70 से अधिक देशों में उपयोग की जाने वाली वाई-फाई कॉलिंग सेवा को लाने का श्रेय एयरटेल को जाता है। इसके तहत ग्राहकों को सेल्युलर नेटवर्क की तरह ही वाई-फाई के जरिए कॉल करने की सुविधा मिलती है, वह भी बिना किसी अतिरिक्त खर्च के। इस सेवा के माध्यम से नेटवर्क समस्या और कॉल ड्रॉप की समस्या अतीत की बात होगी। इस सेवा को वर्ष 2020 में दूरसंचार क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव कहा जा रहा है।
4G के लिए इस्तेमाल किया गया 3G स्पेक्ट्रम
दिल्ली, कोलकाता, एयरटेल जैसे शहरों में लगातार नई तकनीक में निवेश ने अपने मौजूदा 3 जी स्पेक्ट्रम को अपग्रेड करना और 4 जी सेवाओं के लिए इसका उपयोग करना शुरू कर दिया है। यह कदम कंपनी को 4 जी नेटवर्क यूजर बेस बढ़ाने में मदद कर रहा है। साथ ही, कंपनी के मौजूदा 3 जी ग्राहकों को भी 4 जी नेटवर्क और VoLTE कॉलिंग का लाभ मिल रहा है।
4 जी + सेवा और पूर्व -5 जी
हालाँकि, भारत में अभी भी 5G सेवाओं की शुरुआत का समय है। लेकिन एयरटेल ने हमेशा की तरह एक कदम आगे रखते हुए अपनी तैयारी शुरू कर दी है। इसका एक बड़ा हिस्सा MIMO तकनीक है जिसका उपयोग कंपनी कर रही है। जिसकी मदद से कंपनी 4 जी ग्राहकों को बेहतर नेटवर्क कवरेज के साथ जबरदस्त डेटा स्पीड दे रही है। हालांकि यह स्पीड 5G से कम है लेकिन यह 4G नेटवर्क की स्पीड से बहुत ज्यादा है। इसीलिए इसे 4G + या Pre-5G कहा जा रहा है। इसे 5 जी सेवा के जमीनी कार्य के रूप में देखा जाता है।
ई सिम
आने वाले समय में IoT यानी इंटरनेट ऑफ थिंग्स के महत्व को समझते हुए, एयरटेल ने अभी से इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। और यह ई-सिम का हिस्सा है। ई-सिम का मतलब है एक सिम जो फोन या गैजेट्स में इनबिल्ट होगी। यही है, यदि आप ऑपरेटर बदलते हैं तो आपको कार्ड को बार-बार बदलने की ज़रूरत नहीं है। केवल उसे फटकारना है। स्मार्टफोन, टैबलेट के साथ-साथ कार, फ्रिज, टीवी, एसी, स्मार्ट गैजेट्स, कंप्यूटर और टैबलेट जैसे कई उपकरणों में ई-सिम स्थापित किया जाएगा। उन्हें एक सेलुलर नेटवर्क से जोड़ने से आसान डेटा विनिमय और सेवा प्रसंस्करण में मदद मिलेगी। मशीन टू मशीन (एम 2 एम) कनेक्टिविटी के लिए एक डेटा मजबूत नेटवर्क की आवश्यकता होगी जो एयरटेल प्रदान कर सकता है।ई-सिम तकनीक दूरसंचार उद्योग में एक बड़ा बदलाव साबित होगी और एयरटेल इस बदलाव को भारत में लाने के लिए काम कर रही है।
जुड़े हुए गतिशीलता
कनेक्टेड मोबिलिटी के क्षेत्र में भी, एयरटेल देश के बाकी दूरसंचार ऑपरेटरों से एक कदम आगे है। ब्रिटिश कार निर्माता एमजी मोटर्स द्वारा इंटरनेट सक्षम कार, एमजी हेक्टर में एयरटेल की डेटा सेवा का उपयोग किया जा रहा है। इस कार में इनबिल्ट मशीन टू मशीन यानी एम 2 एम सिम होगी, जो कार को हमेशा कनेक्टेड रखेगी।इस सिम को भारती एयरटेल ने सिस्को और यूनीलिमिट के साथ मिलकर तैयार किया है।
यानी भारत में तकनीकी नवाचार लाकर, एयरटेल भारत के दूरसंचार क्षेत्र में एक नया चरण शुरू कर रहा है।इनके अलावा, एयरटेल ने भी ब्रॉडबैंड सेवाओं में मजबूती से अपना कदम रखा है। एयरटेल हमेशा अपने ग्राहकों को मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं की मदद से अपने भविष्य के लिए तैयार नेटवर्क की पेशकश करने के लिए तैयार है और साथ ही साथ प्रौद्योगिकी और नेटवर्क बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए भी। यही कारण है कि एयरटेल स्मार्ट इंडिया का सबसे अच्छा दूरसंचार ऑपरेटर है।
Institutions' founders in the world
Q.No: 6: Lion’s Club
Ans: Melvin John
Q.No: 7: Salvation Army
Ans: William Booth
Q.No: 8: Nursing System
Ans: Florence Nightingale
Q.No: 9: Fascism
Ans: Benito Mussolini
Q.No: 10: Protestant Religion
Ans: Martin Luther
Ans: Melvin John
Q.No: 7: Salvation Army
Ans: William Booth
Q.No: 8: Nursing System
Ans: Florence Nightingale
Q.No: 9: Fascism
Ans: Benito Mussolini
Q.No: 10: Protestant Religion
Ans: Martin Luther
Institutions' founder in the world
Q.No: 1: United Nations
Ans: Joseph Stalin (USSR), Winston Churchill (UK) and Franklin Delano Roosevelt (USA)
Q.No: 2: Red Cross
Ans: Jean-Henri Dunant
Q.No:3: Boy Scouts
Ans: Baden Powell
Q.No4: Y.M.C.A.
Ans: Sir George Williams
Q.No: 5: Kindergarten
Ans: Froebel
Ans: Joseph Stalin (USSR), Winston Churchill (UK) and Franklin Delano Roosevelt (USA)
Q.No: 2: Red Cross
Ans: Jean-Henri Dunant
Q.No:3: Boy Scouts
Ans: Baden Powell
Q.No4: Y.M.C.A.
Ans: Sir George Williams
Q.No: 5: Kindergarten
Ans: Froebel
अगस्टाइन के राज्य विषयक विचार
अगस्टाइन के राज्य विषय विचार
अगस्टाइन के राज्य की उत्पत्ति संबंधी विचार अरस्तु तथा परंपरागत ईसाई विचारधारा से प्रभावित है और वस्तु के समान एक स्थान पर वह राज्य की उत्पत्ति का कारण व्यक्ति की समुदाय प्रवृत्ति बताता है और दूसरे स्थान पर ईसाई विचारधारा के अनुसार आदमी परिणाम का पाप मानता है अगस्टाइन के अनुसार ईश्वर ने पापों को दबाने के लिए और दुष्ट प्रवृत्तियों का निषेध करने के लिए राज्य का निर्माण किया ईश्वर द्वारा निर्मित होने पर भी है शैतान का राज्य क्योंकि इनकी स्थापना की नीतियों को विकसित करने के लिए नहीं वरन दुष्ट प्रवृत्तियों का सम्मान करने के लिए की गई और न्याय में कानून तथा एकता के लिए कोई स्थान नहीं
अगस्टाइन के राज्य की उत्पत्ति संबंधी विचार अरस्तु तथा परंपरागत ईसाई विचारधारा से प्रभावित है और वस्तु के समान एक स्थान पर वह राज्य की उत्पत्ति का कारण व्यक्ति की समुदाय प्रवृत्ति बताता है और दूसरे स्थान पर ईसाई विचारधारा के अनुसार आदमी परिणाम का पाप मानता है अगस्टाइन के अनुसार ईश्वर ने पापों को दबाने के लिए और दुष्ट प्रवृत्तियों का निषेध करने के लिए राज्य का निर्माण किया ईश्वर द्वारा निर्मित होने पर भी है शैतान का राज्य क्योंकि इनकी स्थापना की नीतियों को विकसित करने के लिए नहीं वरन दुष्ट प्रवृत्तियों का सम्मान करने के लिए की गई और न्याय में कानून तथा एकता के लिए कोई स्थान नहीं
संत अगस्टाइन के मुख्य राजनीतिक विचारों की विवेचना
संत अगस्टाइन के मुख्य राजनीतिक विचारों की विवेचना
संत अगस्टिन यूनानी यों की भांति राजनीतिक चिंतक तथा रो मनो की भांति भी विधिवेत्ता नहीं था। वह चर्चा संस्थापक एवं धर्म उपदेशक था और उसने ईसाई मत तथा आध्यात्मिक से प्रेरित होकर राजनीतिक विचारों का प्रतिपादन किया । अगस्टाइन ने इस बात पर बल दिया कि विश्व में सभी चीजों का कारण ईश्वर है और इतिहास ईश्वर की ना जाने जा सकने वाली इच्छा का प्रकट रूप है उसने कहा कि इस पृथ्वी पर सभी वस्तुएं ईश्वरी राज्य की स्थापना की ओर जा रही हैं
अगस्टाइन की दो राज्यों की धारणा
राजनीतिक विचारों के क्षेत्र में अगस्टाइन के सबसे महत्वपूर्ण विचार दो राज्यों की धारणा के रूप में है। उसके द्वारा दो राज्यों की धारणा के प्रतिपादन का उद्देश्य ईसाई धर्म को प्रतिष्ठित करना है। उसका विश्वव्यापी प्रसार और एक सार्वभौमिक इसाई संघ की स्थापना लिए सैद्धांतिक पृष्ठभूमि तैयार करना था।की
अगस्टाइन की धारणा के दो राज्य हैं- सांसारिक राज्य या शैतान का राज्य और ईश्वरी राज्य। उसने इन दो राज्यों की धारा का प्रतिपादन व्यक्ति के दोहरे स्वभाव के आधार पर किया है उसके विचार अनुसार व्यक्ति के स्वभाव के दो रूप हैं एक संसार एक राज्य जो शरीर से संबंधित होता है और दूसरा अध्यात्मिक राज्य जिसका संबंध आत्मा से होता है अपनी इस दविमुखी प्रतिभा के कारण व्यक्ति की लौकिक व दैविक समाज का सदस्य है लौकिक समाज का आधार आत्मिक शांति व मृत्यु की भावना है दोनों राज्यों का उदाहरण देते हुए लिखा है कि रोमन साम्राज्य सांसारिक राज्य का प्रतीक है कि ईश्वर ने ईश्वरी राज्य के लिए सबको निर्मित किया था किंतु व्यक्तियों ने अपनी खूबियों के कारण इस राज्य की सदस्यता का अधिकार खो दिया अब ईश्वरी राज्य की सदस्यता ईश्वर की अनुकंपा पाने पर ही मिल सकती है
अगस्टाइन के अनुसार ईश्वरी राज्य की दो विशेषताएं न्याय और शांति
अगस्टाइन न्याय को ईश्वरी राजा का प्रथम तत्व मानते हुए कहता है कि जिन राज्यों में न्याय नहीं रह जाता विभागों के झुंड मात्र कहे जा सकते हैं न्याय एक व्यवस्थित और अनुशासित जीवन व्यतीत करने तथा उन कर्तव्यों का पालन करने में है जिनकी व्यवस्था मांग करती है शांति को अगस्टाइन ईश्वरी राज की दूसरी विशेषता मानता है उसके अनुसार सद्भावना और सामंजस्य में भागी व्यक्तियों के सकारात्मक संबंध ही शांति हैं
मैक्यावली आधुनिक युग का जनक है और अपने युग के शिशु के रूप में
मैक्यावली आधुनिक युग का जनक है और अपने युग के शिशु के रूप में
प्रोफेसर डैनिंग के अनुसार यह है कि यह प्रतिभा संपन्न फ्लोरेंस वासी वास्तविक अर्थ में अपने युग का शिशु था। मैकियावेली पर एकदम उपयुक्त विचार प्रतीत होता है मैक्यावली का युग पुनर्जागरण का युग था। और इसी कारण इसे पुनर्जागरण का प्रतिनिधि विकास जाता है मैकियावेली अपने युग से जितना प्रभावित हुआ उतना बहुत ही कम लोग अपने युग से प्रभावित होते हैं मैकियावेली अपने युग का एक हिस्सा दार्शनिक और पर्यवेक्षक है जिसने समकालीन परिस्थितियों को सही और यथार्थ रूप में देखा उस समय की सामाजिक व राजनीतिक बुराइयों का अनुभव किया जागरण योग्य कि जिन बातों ने मैक्यावली पर सबसे गहरा प्रभाव डाला उसके राजनीतिक दर्शन की रूपरेखा निर्धारित की जिसके कारण उसे अपने युग का शिशु कहा जाता है उन्हें निम्नलिखित शिक्षकों के अंतर्गत रखा जा सकता है
1.शक्तिशाली राजस्थान दरों की स्थापना
और राज्य वाद के समाप्त होने के बाद निरंकुश राजतंत्र की स्थापना इंग्लैंड फ्रांस और स्पेन में हो गई यह राज्यसभा शासकों के नेतृत्व में दिन-प्रतिदिन शक्तिशाली और समृद्ध साले होते जा रहे थे वास्तव में यह योग सबल राजतंत्र का युग था मैकियावेली अपनी रचनाओं में इनका पर्याप्त प्रमाण भी देता है मैक्यावली अपनी पुस्तक प्रिंस और डिसकोर्सेज में इटली के लिए शासन की कल्पना करता है जिसमें इटली की समस्त राजनीतिक शक्ति का केंद्रीकरण हो और वहां सबल राजस्थान के स्थापना हो
2.राष्ट्रीयता की भावना........
प्रोफेसर डैनिंग के अनुसार यह है कि यह प्रतिभा संपन्न फ्लोरेंस वासी वास्तविक अर्थ में अपने युग का शिशु था। मैकियावेली पर एकदम उपयुक्त विचार प्रतीत होता है मैक्यावली का युग पुनर्जागरण का युग था। और इसी कारण इसे पुनर्जागरण का प्रतिनिधि विकास जाता है मैकियावेली अपने युग से जितना प्रभावित हुआ उतना बहुत ही कम लोग अपने युग से प्रभावित होते हैं मैकियावेली अपने युग का एक हिस्सा दार्शनिक और पर्यवेक्षक है जिसने समकालीन परिस्थितियों को सही और यथार्थ रूप में देखा उस समय की सामाजिक व राजनीतिक बुराइयों का अनुभव किया जागरण योग्य कि जिन बातों ने मैक्यावली पर सबसे गहरा प्रभाव डाला उसके राजनीतिक दर्शन की रूपरेखा निर्धारित की जिसके कारण उसे अपने युग का शिशु कहा जाता है उन्हें निम्नलिखित शिक्षकों के अंतर्गत रखा जा सकता है
1.शक्तिशाली राजस्थान दरों की स्थापना
और राज्य वाद के समाप्त होने के बाद निरंकुश राजतंत्र की स्थापना इंग्लैंड फ्रांस और स्पेन में हो गई यह राज्यसभा शासकों के नेतृत्व में दिन-प्रतिदिन शक्तिशाली और समृद्ध साले होते जा रहे थे वास्तव में यह योग सबल राजतंत्र का युग था मैकियावेली अपनी रचनाओं में इनका पर्याप्त प्रमाण भी देता है मैक्यावली अपनी पुस्तक प्रिंस और डिसकोर्सेज में इटली के लिए शासन की कल्पना करता है जिसमें इटली की समस्त राजनीतिक शक्ति का केंद्रीकरण हो और वहां सबल राजस्थान के स्थापना हो
2.राष्ट्रीयता की भावना........
सोनभद्र(sonbhadra), सोने की खान
सोनभद्र
सोनभद्र या सोनभद्र उत्तर प्रदेश, भारत के क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा जिला है। प्राचीन समय से भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता है इसका कारण है कि भारत कई जगहों पर सोने की खान की असीमित भंडार होना माना जाता है सोनभद्र जिले की सोन पहाड़ियों में सोने की भंडार मिलने से इस जगह का नाम सोन नाम से प्राचीन समय से जाना जाता है इस के आस पास के इलाके को सोनांचल क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है भारत का एकमात्र जिला है जो पश्चिम में चार राज्यों अर्थात् दक्षिण में छत्तीसगढ़, दक्षिण पूर्व में झारखंड और उत्तर-पूर्व में बिहार की सीमा में आता है। जिले का क्षेत्रफल 6788 वर्ग किमी और 1,862,559 (2011 की जनगणना) की आबादी है, जिसकी जनसंख्या घनत्व 270 व्यक्ति प्रति किमी² है। यह राज्य के दक्षिण-पूर्व में स्थित है और मिर्जापुर जिले से उत्तर-पश्चिम, चंदौली जिले तक घिरा हुआ है। उत्तर में, बिहार राज्य के कैमूरंद रोहतास जिले, उत्तर पूर्व में झारखंड राज्य का गढ़वा जिला, दक्षिण में छत्तीसगढ़ राज्य का बलरामपुर जिला और पश्चिम में मध्य प्रदेश राज्य का सिंगरौली जिला है। जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज शहर में है। सोनभद्र जिला एक औद्योगिक क्षेत्र है और इसमें बहुत सारे खनिज जैसे बॉक्साइट, चूना पत्थर, कोयला, सोना आदि हैं। सोनभद्र को "भारत की ऊर्जा राजधानी" कहा जाता है क्योंकि वहाँ बहुत सारे बिजली संयंत्र हैं। सोनभद्र विंध्य और कैमूर पहाड़ियों पर स्थित है। , और इसके टोपोलॉजी और प्राकृतिक वातावरण ने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरू ने सोनभद्र को भारत का स्विट्जरलैंड कहा।इस क्षेत्र में सोने की खान का पता अग्रेज के समय से ही लगाया जा रहा था परंतु इस पर मुहर लगते लगते एक लंबा समय बीत चुका है अब जाकर इस क्षेत्र में सोने की खान का पुख्ता सबूत मिलने से और कई तरह के जांच के बाद अब इस क्षेत्र को अधिग्रहण करने तथा खान कि खुदाई के कार्य को सरकार तीव्र गति से इस पर कार्य किया जा रहा है।
अरस्तु के परिवार,संपत्ति और दासता संबंधी विचारों
अरस्तु के परिवार,संपत्ति और दासता संबंधी विचारों
अरस्तु परिवार संस्था को मानव जीवन के लिए स्वाभाविक आवश्यक और उपयोगी मानता है और लिखता है कि परिवार विकसित समुदायों में सबसे प्रमुख समुदाय है।जो मनुष्य द्वारा अपने दैविक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए संगठित किया जाता है अरस्तु के अनुसार परिवार एक प्राकृतिक संस्था है जिसका अस्तित्व व्यक्ति की कामवासना संतानोत्पत्ति प्रेम त्याग और अन्य प्रवृत्तियों के साथ जुड़ा हुआ है। परिवार का आधार विवाह है। जो अपने आप में एक पवित्र संस्था है परिवार राज्य का आधार और राज्य की ही भांति प्राकृतिक है। ऐतिहासिक दृष्टि से परिवार ने ही राज्य की उत्पत्ति को संभव बनाया है अरस्तू प्लेटो के समान स्त्री-पुरुष की समानता में भी विश्वास नहीं करता उसके अनुसार पुरुष का विशेष आदेश देना और स्त्री का विशेष गुण आदेश का पालन करना है। इस दृष्टि से वस्तु के परिवार मिस्त्री का कार्य पुरुष के आदेश का पालन करना है। अरस्तू बेटों की तुलना में रविवार को एक दूसरे से भिन्न मानता है वह कहता है। कि राज्य के अंतर्गत शासन और शासित के रूप में केवल एक ही प्रकार संबंध होता है। लेकिन परिवार में तीन प्रकार के संबंध होते हैं पति-पत्नी पिता पुत्र और स्वामी तथा दास का संबंध अरस्तु परिवार और विवाह संस्था को उपयोगी मानते हुए इन्हें बनाए रखने का समर्थक है। लेकिन अरस्तु स्वस्थ संतानों की उत्पत्ति के लिए विवाह का राज्य द्वारा नियम अनावश्यक समझता है। स्त्री और पुरुष की आयु में 20 वर्ष के अंतर को उचित मानता है। उसका विचार है कि विवाह के समय स्त्री की आयु 18 वर्ष की आयु 37 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। इसी प्रकार संतानोत्पत्ति के लिए पुलिस की अधिकतम आयु 70 वर्ष स्त्री की अधिकतम आयु 50 वर्ष मानी जा सकती है। उसका कहना है। कि आवश्यकता से अधिक जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए राज्य को कानून बनाने का अधिकार होना चाहिए।संतान के जन्म को रोकने के लिए गर्भपात का आश्रय लिया जाना चाहिए।संतानों का पालन पोषण राज द्वारा प्रतिबंधित होना चाहिए परिवार और विवाह से संबंधित कुछ विशेषता परिवार नियोजन आदि के संबंध में अरस्तु का दृष्टिकोण वैज्ञानिक लगता है। लेकिन विवाह संबंध स्थापित करने और संतान उत्पत्ति के संबंध में चिकित्सक के निर्देश और अन्य नियमों की विस्तृत व्याख्या अरस्तु द्वारा की गई है। वह निश्चित रूप से व्यावहारिक है और अरस्तू के संबंध में या कहा जा सकता है। कि उसने परिवार विवाह संस्था और पति पत्नी के भाव आत्म को अनदेखा कर दिया है।
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